मेहंदीपुर बालाजी मेहंदीपुर, राजस्थान
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मेहंदीपुर बालाजी के दर्शन का समय  श्री बालाजी महाराज के मंदिर की दिनचर्या

श्री मेहन्दीपुर MEHANDIPUR BALA JI  धाम की जानकारी श्री बालाजी महाराज के मंदिर की दिनचर्या प्रतिदिन सुबह पांच बजे मुख्यद्वार खुलने के साथ शुरू होती है। मंदिर की धुलाई-सफाई और फिर श्री Mehndipur Bala Ji बाला जी महाराज की पूजा-अर्चना होती है । सबसे पहले श्री  बालाजी महाराज का गंगाजल से अभिषेक होता है। अभिषेक वैदिक रीति से मंत्रोचारण के साथ होता है। पांच पुजारी इसमें लगते हैं। मंदिर प्रांगण में पूरे दिन करीब 25 ब्राह्मणों की सेवा रहती है, लेकिन श्री  Mehndipur Bala Ji बालाजी महाराज के श्रृंगार में मात्र पुजारी ही शामिल होते हैं। मेंहदीपुर बालाजी का रहस्य गंगाजल से स्नान कराने के बाद चोले का नम्बर आता है। चोला श्री Mehndipur Bala Ji बालाजी महाराज के श्रृंगार का मुख्य हिस्सा है। यह सप्ताह में तीन बार सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार को चढ़ाया जाता है। अभिषेक के बाद चमेली का तेल श्री बालाजी के पूरे शरीर पर लगाया जाता है। इसके बाद सिंदूर होता है जो आम दुकानों पर नहीं मिलता। सिंदूर को ही सामान्य भाषा में चोला कहते हैं। इसके बाद चांदी के वर्को से  बालाजी महाराज जी को सजाया जाता है। चांदी के वर्क के बाद सोने के वर्क लगाए जाते हैं। इसके बाद चंदन, केसर,केवड़ा और इत्र के मिश्रण से तैयार तिलक लगाया जाता है। फिर बारी आती है, आभूषण और गुलाब की माला आदि की। पूरे श्रृंगार में लगभग डेढ़ घंटे का समय लगता है। इसके बाद भोग और फिर सुबह की आरती। मेंहदीपुर बालाजी श्रृंगार के समय मंदिर के पट बंद रहते हैं। लेकिन आरती का समय होते-होते मंदिर के बाहर भक्तों का जनसूमह एकत्रित हो जाता है। जैसे ही आरती शुरू होती है। श्री   बालाजी महाराज के जयकारो, घंटों और घड़ियालों की आवाजों से पूरी मेंहदीपुर घाटी गुंज उठती है…आरती लगभग 40 मिनट तक चलती है। आरती सम्पन्न होते ही भक्त और भगवान का मिलन प्रारम्भ हो जाता है। जो रात्रि लगभग नौ बजे तक अवरत चलता रहता है। केवल दोपहर एवं रात्री भोग के समय आधा-आधा घंटे के लिए श्री   बालाजी महाराज के पट बंद होते हैं। वह भी पर्दे डालकर। सुबह आरती के बाद पहले   बालाजी का बाल भोग लगता है जिसमें बेसन की बूंदी होती है। फिर राज-भोग का भोग लगता है। श्री  बाला जी महाराज जी का भोग मंदिर में स्थित बालाजी मेंहदीपुर बालाजी का रहस्य रसोई में ही तैयार किया जाता है। इसमें चूरमा मेवा, मिष्ठान आदि होता है। भोग बाद में दर्शनार्थी भक्तों में वितरित किया जाता है। भक्तों को दिया जाने वाला भोग डिब्बो में पैक होता है। जबकि अभिषेक का गंगाजल भक्तों को चरणामृत के रूप में वितरित किया जाता है। दोपहर के समय श्री  बालाजी महाराज का विशेष भोग लगाया जाता है। इसे दोपहर का भोजन भी कहा जा सकता है। मेंहदीपुर बालाजी के भोग से पहले उनके प्रभु श्री राम और माता सीता जी अर्थात मुख्य मंदिर के सामने सड़क पार बने श्री

सीताराम मंदिर में भोग लगता है, तत्पश्चात बालाजी का भोग लगता है। बालाजी के साथ श्री गणेश, श्री प्रेतराज सरकार, भैरव जी आदि का भी भोग लगता है। इस भोग के दौरान आधा घंटे के लिए दर्शन बंद रहते हैं। शाम पांच बजे श्री बालाजी का पुन: अभिषेक होता है। इसमें लगभग एक घंटे का समय लगता है। तत्पश्चात शाम की आरती होती है । सबसे अंत में शयन भोग लगता है। यह चौथा भोग होता है। दूध,मेवा का यह भोग भी बाद में प्रसाद के रूप में दर्शानार्थी भक्तों को बांटा जाता है। घाटा मेंहदीपुर वाले बाबा के मंदिर में उमड़ने वाली भक्तों की भीड़ का जहां तक सवाल है। अब यह बारहमासी है। अर्थात प्रतिदिन यहां भक्तों की भीड़ रहती है। देश के दूर-दूर क्षेत्रों से यहां दर्शानार्थी भक्त आते हैं। लेकिन मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष भीड़ होती है।आस-पास के क्षेत्रों में श्री बालाजी महाराज जी के दर्शन आसपास के लोगों के लिए ठीक वैसी ही दिनचर्या का अंग है जैसा कि सुबह-शाम का भोजन। डेढ़ से दो घंटे तक लाईन में लगने के बाद भक्त और भगवान का मिलन आम बात है, मगर इस मिलन के बाद दर्शनार्थी भक्तों के चेहरों पर जो संतोष भाव होता है उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।जय सियाराम जी
जय श्री बालाजी मेंहदीपुर बालाजी का रहस्य

Mehndipur balaji मेंहदीपुर बालाजी जाने का रास्ता

राजस्थान राज्य के 2 जिलों सवाई माधोपुर बदौसा में विभक्त घाटा मेहंदीपुर स्थान बड़ी लाइन के बांदीकुई स्टेशन से जो कि दिल्ली जयपुर अजमेर अहमदाबाद लाइन पर है 24 मील की दूरी पर स्थित है इसी प्रकार बड़ी लाइन के हिंडोन स्टेशन से भी यहां के लिए बसें मिलती हैं अब तो आगरा मथुरा वृंदावन अलीगढ़ आदि से सीधी बसें जो जयपुर जाती हैं बालाजी के मोड़ पर रूकती हैं फ्रंटियर मेल से महावीरजी स्टेशन पर उतरकर श्री हिंडौन आकर होकर बस द्वारा बालाजी पहुंचा जा सकता है हिंडौन सिटी स्टेशन पश्चिम रेलवे की बड़ी लाइन पर बयाना और महावीरजी स्टेशनों के बीच दिल्ली मथुरा कोटा रतलाम बड़ौदा मुंबई लाइन पर स्थित है हिंडौन से सभा घंटे का समय बालाजी तक बस द्वारा लगता है ।

श्री मेंहदीपुर बालाजी का रहस्य तथा इतिहास

श्री मेंहदीपुर बालाजी का रहस्य तथा इतिहास Mehndipur balaji

श्री मेंहदीपुर बालाजी का रहस्य तथा इतिहास -यह स्थान दो पहाड़ियों के बीच बसा हुआ है बहुत आकर्षक दिखाई पड़ता है यहां की शुद्ध जल वायु और पवित्र वातावरण मन को बहुत आनंद प्रदान करता है यहां नगर जीवन की रचनाएं भी देखने को मिलेंगी यहां मुख्य रूप से तीन देवों की प्रधानता है जिसमें कि श्री मेंहदीपुर बालाजी महाराज श्री प्रेतराज सरकार और श्री कोतवाल कप्तान भैरव देव यह तीन देव यहां आज से लगभग 1000 वर्ष पूर्व प्रकट हुए थे इनके प्रकट होने से लेकर अब तक 12 महंत इस स्थान पर सेवा पूजा कर चुके हैं और अब तक इस स्थान के दो महंत इस समय भी विद्वान हैं सर्व प्रथम श्री गणेश पुरी जी महाराज भूतपूर्व सेवक श्री किशोर पुरी जी महाराज वर्तमान सेवक यहां के उत्थान का युग श्री गणेश पुरी जी महाराज के समय से प्रारंभ हुआ और अब दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है प्रधान मंदिर का निर्माण इन्हीं के समय में हुआ सभी धर्मशालाएं इन्हीं की समय में बनी इस प्रकार इन का सेवाकाल श्री बालाजी घाटा मेहंदीपुर के इतिहास का स्वर्ण युग कहलाएगा प्रारंभ में यहां घोर बीहड़ जंगल था घनी झाड़ियों में शेर चीते बघेरा आदि जंगली जानवर पड़े रहते थे चोर डाकुओं का भी भय था

श्री महंत जी महाराज के पूर्वजों को जिनका नाम अज्ञात है स्वप्न हुआ और स्वप्न की अवस्था में ही वे उठ कर चल दिए उन्हें पता नहीं चला कि वह कहां जा रहे हैं और इसी दिशा में उन्होंने एक बड़ी विचित्र लीला देखी एक और से हजारों दीपक जलते आ रहे हैं हाथी घोड़ों की आवाजें आ रही हैं एक बहुत बड़ी फौज चली आ रही है उस फौज ने श्री बालाजी महाराज की मूर्ति को तीन प्रदक्षिणाएँ की और फौज के प्रधान ने नीचे उतरकर श्री महाराज की मूर्ति को साष्टांग प्रणाम किया तथा जिस रास्ते से आए थे उसी रास्ते से चले गए गोसाई जी महाराज चकित होकर सब देख रहे थे उन्हें कुछ डर सा लगा और भी वापस अपने गांव चले गए किंतु नींद नहीं आई और बार-बार उसी विषय पर विचार करते हुए उनकी जैसे ही आंखें लगी उन्हें स्वप्न में तीन मूर्तियां उनके मंदिर और विशाल वैभव दिखाई पड़ा उनके कानों में यह आवाज आई उठो मेरी सेवा का भार ग्रहण करो मैं अपनी लीला का विस्तार करूंगा यह बात कौन कह रहा था कोई दिखाई नहीं पड़ा गुसाई जी ने एक बार भी इस पर ध्यान नहीं दिया

अंत में श्री हनुमान जी महाराज ने इस बार स्वयं उन्हें दर्शन दिए और पूजा का आग्रह किया दूसरे दिन गुसाईं जी महाराज मूर्ति के पास गए तो उन्होंने चारों से घंटा घड़ियाल की आवाजें आ रही हैं किंतु दिखाई कुछ नहीं दिया इसके बाद श्री गुसाईं जी ने आसपास के लोग इकट्ठे किए सारी बात उन्हें बताएं उन लोगों ने मिलकर श्री महाराज की छोटी सी तिवारी बना दी और यदा-कदा मेंहदीपुर बालाजी का रहस्य भोग प्रसाद की व्यवस्था कर दी कई चमत्कार श्री महाराज ने दिखाए किंतु यह बढ़ती हुई कला कुछ विधर्मियों के शासनकाल में फिर से लुप्त हो गई किसी शासक ने महाराज की मूर्ति को खोदने का प्रयत्न किया सैकड़ों हाथ खोद लेने पर भी जब मूर्ति के चरणों का अंत नहीं आया तो वह हार मानकर चला गया वास्तव में इस मूर्ति को अलग से किसी कलाकार ने नहीं बनाया अपितु यह तो पर्वत का ही अंग है उसका कनक भूधराकार शरीर है इसी मूर्ति के चरणों में एक छोटी सी कुंडी थी जिसका जल कभी बीता ही नहीं था रहस्य यह है कि महाराज की वांयी और छाती के नीचे से एक बारीक जलधारा निरंतर बहती रहती है जो पर्याप्त चोला चढ़ जाने पर भी बंद नहीं होती इस प्रकार तीनों देवों की स्थापना हुई । मेंहदीपुर बालाजी का रहस्य

जब श्री बालाजी महाराज ने अपना चोला बदला Mehndipur balaji

जब श्री बालाजी महाराज ने अपना चोला बदला -विक्रम संवत 1969 मैं श्री मेंहदीपुर बालाजी महाराज ने अपना चोला बदला उतारे हुए चोली को गाड़ियों में भरकर श्री गंगा में प्रवाहित करने हेतु बहुत से आदमी चल दिए चोले को लेकर जब मंडावर रेलवे स्टेशन पर पहुंचे तो रेलवे अधिकारियों ने चोले का लगेज तय करने हेतु चोला तोला किंतु तोलने में ही नहीं आया कभी एक मन बढ़ जाता तो कभी एक मन घट जाता अंत में हार कर चोला वैसे ही गंगा जी को सम्मान सहित भेज दिया गया।उस समय हवन ब्राह्मण भोजन एवं धर्म ग्रंथों का परायण हुआ और नए चोले में एक नई ज्योति उत्पन्न हुई जिसने भारत के कोने कोने में प्रकाश फैला दिया मेंहदीपुर बालाजी का रहस्य

मेंहदीपुर बालाजी की विशेषता Mehndipur balaji

यहां की सबसे बड़ी विशेषता यही है की मूर्ति के अतिरिक्त किसी व्यक्ति विशेष का कोई चमत्कार नहीं है क्या है श्रद्धा और भक्ति स्वयं श्री महंत जी महाराज विषय में उसने यहां सबसे बड़ा असर सेवा और भक्ति का ही है चाहे कोई कैसा भी बीमार हो वह सच्ची श्रद्धा लेकर आया है तो उसकी महाराज उसे बहुत शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं इसमें कोई संदेह नहीं भूत प्रेत की बाधा पागलपन मिर्गी लकवा टीवी या अन्य किसी भी प्रकार की कोई बीमारी क्यों ना हो अति शीघ्र दूर हो जाती है यदि हम लोग भौतिक विज्ञान के युग में रह रहे हैं और देवता या भूत प्रेत आदि में विश्वास नहीं करते हैं किंतु शायद श्री बालाजी के स्थान पर आकर आप अपना सारा ज्ञान भूल जाएंगे यहां बड़े-बड़े विज्ञानी विचारक भी यहां श्री महाराज के चरणों की शरण में आकर सब कुछ भूल जाते हैं और तन मन से श्री चरणों के भक्त बन जाते हैं जैसा कि कहा गया है नास्तिक भी आशिक बन जाते हैं मेंहदीपुर बालाजी दरबार में यहां आने पर ही मनुष्य को विदित होता है कि भूत आदि किस प्रकार मानव जाति को पूरा पहुंचाते हैं तथा किस प्रकार से छुटकारा मिलता है

जैसे ही दुखी आदमी महाराज के दरबार में आता है उसे कुछ थोड़ा सा प्रसाद तीनों देवताओं को चलाना पड़ता है जिसमें श्री मेंहदीपुर बालाजी बालाजी महाराज को लड्डू का प्रसाद श्री प्रेतराज सरकार का प्रसाद श्री गोपाल कप्तान भैरव जी महाराज को उड़द का प्रसाद लगाया जाता है इस प्रसाद में से दो लड्डू खिलाए जाते हैं बाकी बचा हुआ प्रसाद जानवरों को डाल दिया जाता है ज्यों ही मरीज लड्डू खाता है झूमने लगता है और स्वयं ही भूत उसके शरीर में आकर बोलने लगता है उसके ऊपर अपने आप ही भयंकर मार पड़ने लगती है वह भागने की कोशिश करता है किंतु अपने आप ही उसके हाथों में हथकड़ी और पैरों मेंहदीपुर बालाजी का रहस्य में बेड़ियां पड़ जाती हैं अपने हाथों से ही अपने सिर में सैकड़ों जूते मारता है हाहाकार मच आता है कभी महाराज की आज्ञा से पेड़ से उल्टा लटक जाता है कभी आग जलाकर जाता है और फांसी पर लटक जाता है यहां तक कि उसे तंग आकर या तो महाराज के चरणो में बैठ जाता है अन्यथा समाप्त कर दिया जाता है ईमानदारी के साथ जो महाराज के चरणों में बैठ जाता है उन्हें अपना दूत बना लेते हैं संकट कट जाने के बाद प्रत्येक रोगी को भी महाराज की ओर से एक दूत मिलता है जो कि सदा उसके पास रहता है और आगे होने वाली किसी भी बात की सूचना देता रहता है किंतु कभी-कभी ऐसा भी देखने आएगी लोग दूत की बातों या बहकावे में आकर अपना नुकसान कर बैठते हैं जब तक उन्हें अपना स्वयं का दूत ना मिले तब तक शांति पूर्वक चरणों में प्रार्थना करते रहना चाहिए क्योंकि प्रार्थना में अपार शक्ति होती है । मेंहदीपुर बालाजी का रहस्य

मेहंदीपुर बालाजी के नियम अक्सर लोग यह गलतियाँ करते हैं Mehndipur balaji

अक्सर लोग यह गलतियाँ करते हैं -यहां कोई अस्पताल या दवाखाना नहीं है ना ही यहां कोई डॉक्टर वैद्य है यहां के तो सार्वभौम श्री बालाजी महाराज हैं बहुत से यात्री रोगी को यहां लाकर डाल देते हैं ना तो महाराज से प्रार्थना ही करते हैं ना ही निर्धारित नियमों का पालन ही करते हैं और पूजा और आरती के समय भी मंदिर में आने का कष्ट नहीं करते बाहर ही चहल कदमी करते हैं इधर-उधर की निंदा स्तुति करते हैं और जब कष्ट दूर नहीं होता तो बालाजी महाराज को दोष देते हैं और ना जाने क्या क्या उटपटांग बकते फिरते हैं बुद्धिजीवियों का यहां आना व्यर्थ है यहां तो अपने मान सम्मान की चिंता छोड़ देनी चाहिए भगवान के दरबार में भक्तों का कोई निजी मान सम्मान नहीं होता शायद आपने सुना होगा

कि द्रौपदी जिस समय दुष्टों से घिरकर चिल्लाई थी स्वयं बैकुंठ नाथ ने आकर उसका चीर बढ़ाया था, गजराज को मारा था और प्रहलाद को बचाया था यह सब भक्ति का ही प्रभाव था रामायण में गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है रामहि केवल प्रेम पियारा वास्तव में प्रार्थना में महान शक्ति है अतः सभी यात्री भाइयों का यह पुनीत कर्तव्य है कि वे तन मन धन से श्री महाराज के चरणों को अनुगामी बन जाए और कहीं भी इधर-उधर भटकने का कष्ट ना करें महाराज जी उनके कष्टों को दूर कर देंगे कहा भी है एक ही साधे सब सधे सब साधे सब जाय गीता में जो भी रोगी इस स्थान पर आएं उन्हें पूर्ण भक्त बन कर आना चाहिए तथा तभी उनके संकट शीघ्र समाप्त होंगे। मेंहदीपुर बालाजी का रहस्य

मेंहदीपुर बालाजी में रूकने की व्यवस्था Mehndipur balaji

यहां भारत के कोने-कोने से यात्री आते हैं उनके रहने की समुचित व्यवस्थाएं हैं अनेक बड़ी बड़ी धर्मशालाएं हैं पानी और बिजली है इनके अतिरिक्त दैनिक जीवन की सभी वस्तुएं उपलब्ध होने हेतु बाजार है यहां की एक जो सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अन्य तीर्थ स्थानों की तरह यहां ना तो पुजारी यात्रियों से कुछ मांगते हैं यहां सब कुछ मेंहदीपुर बालाजी बालाजी महाराज हैं यह स्थान प्रारंभ से ही गोस्वामी निहंग मत अधिकारियों के अधिकार में रहा है वर्तमान समय का वैभव श्री गणेश पुरी जी महाराज के सेवाकाल में बड़ा वास्तव में इनकी सेवा और साधना इतनी उच्च कोटि की थी कि जिस की समानता कहीं अन्यत्र नहीं मिल सकती आप पूज्य पाद गुसाईं श्री शिव पुरी के योग्य शिष्य हैं वर्तमान समय में श्री गणेश पुरी जी महाराज के सर्वाधिक योग्य शिष्य श्री किशोर पुरी जी महाराज स्थान के उत्तराधिकारी नियुक्त किए गए हैं इस समय श्री महाराज की सेवा पूजा की संपूर्ण व्यवस्था का भार आपके ही ऊपर है आप बहुत ही योग्य विद्वान एवं चरित्रवान हैं आपका स्वभाव गंगाजल के समान निर्मल है हमें पूर्ण विश्वास है कि आप के सेवाकाल में इस स्थान की दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति होगी अतिथि सत्कार साधु और ब्राह्मणों की सेवा अनुष्ठान और यज्ञ यहां निरंतर चलने वाले धार्मिक कृत्य है जिसके आधार पर इस स्थान की निरंतर प्रगति होती जा रही है। मेंहदीपुर बालाजी का रहस्य

Mehndipur balaji मेंहदीपुर बालाजी का रहस्य

शायद यहां की लीला का वास्तविक रहस्य ही है यहां आने का के पश्चात यात्रियों का यह कर्तव्य है कि वे इधर-उधर सात पहाड़ आदि के चक्कर में पड़कर भटकते हैं यदि किसी प्रकार का खतरा हो गया तो स्थान इसके लिए उत्तरदाई नहीं होगा अतः किसी आदमी के बहकावे में उधर उधर भटकने का कष्ट ना करें केवल वह श्री महाराज के चरणों का ही ध्यान करें सभी यात्रियों के साथ सहयोग का भाव रखें मैं ऐसे स्वर्गीय आनंद के देने वाले इस पावन स्थल के निरंतर प्रगती की कामना करता हूं भगवत भक्त शब्द रूप का व्रत और महान विभूति स्वर्गीय श्री गणेश पुरी जी महाराज एवं उनके उत्तराधिकारी महान सुधार एवं निर्मल ह्रदय श्री किशोर पुरी जी का हृदय से आभार प्रकट करता हूं और आशा करता हूं जब तक स्थिर हैं धरा गगन रवि शशि तारक जल पवन तब तक इस पावन धाम का होगा इस जग में चरण इस विषय का उल्लेख करने में मुझे जिन महानुभावों का योगदान मिला उनके प्रति हार्दिक धन्यवाद अर्पित करता हूं मेंहदीपुर बालाजी का रहस्य

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