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3 महीनों तक चलने वाली नालंदा यूनिवर्सिटी को खिलजी ने क्यों जलाया था-

दोस्तों नमस्कार indohindi.in पर आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है आज हम बात करेंगे भारत के एक ऐसे विश्वविद्यालय के बारे में जिस में आग लगाने पर 3 महीनों तक उस आग को नहीं बुझा पाए थे विश्व प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय को किसने और क्यों जलाया हम बात कर रहे हैं नालंदा यूनिवर्सिटी की अगर अतीत के पन्नों में झांके तो हमें याद आएगा नालंदा विश्वविद्यालय और नालंदा का जिक्र हो तो खिलजी का नाम ना आए ऐसा भी संभव नहीं आज आप जानेंगे उस नालंदा के विलेन के बारे में जिसने एक भारतीय वैध की अच्छाई का बदला अपनी विनाशकारी सोच से दिया बात उस समय की है जब एक बार बख्तियार खिलजी बुरी तरह बीमार पड़ गया एक से बढ़कर एक हकीम आए लेकिन बख्तियार खिलजी की सेहत मैं सुधार ना कर सके जब मरने की नौबत आ गई तो उसे कुछ बुद्धिमान लोगों ने नालंदा यूनिवर्सिटी के आयुर्वेद शाखा के प्रमुख श्री राहुल श्रीभद्र जी से इलाज करवाने की सलाह दी लेकिन कट्टरपंथी विचार वाले खिलजी ने हिंदुस्तानी वैध से इलाज करवाने से मना कर दिया उसे तो अपने हकीमों पर ही ज्यादा भरोसा था वह इस बात को मानने को ही तैयार नहीं था कि भारतीय वैद्य हकीम से ज्यादा होशियार हो सकते हैं लेकिन जब हकीमों के इलाज से खिलजी स्वस्थ ना हो सका तो आखिरकार भारतीय वैद्य राहुल श्रीधर जी को बुलाने को तैयार हो गया लेकिन एक शर्त भी रखी कि भारतीय वैध राहुल श्रीधर जी किसी भी हिंदुस्तानी दवा का इस्तेमाल नहीं करेंगे और अगर खिलजी स्वस्थ ना हुआ तो राहुल श्रीधर जी को मौत की नींद सुला दिया जाएगा इस शर्त को सुनकर राहुल श्रीधर जी सोच में पड़ गए और अपनी सहिष्णुता का परिचय देते हुए इस शर्त को मुस्कुराते हुए स्वीकार भी कर लिया नालंदा विश्वविद्यालय को क्यों जलाया गया था

भारतीय वैद्य राहुल श्रीधर जी ने खिलजी का इलाज कैसे किया

भारतीय वैद्य राहुल श्रीधर जी ने खिलजी का इलाज कैसे किया – कुछ दिन बाद भारतीय वैध श्री राहुल श्रीधर जी एक कुरान लेकर खिलजी के पास पहुंचे उन्होंने खिलजी से कहा कि इसके 7 पन्ने रोज पढ़िए ठीक हो जाएंगे असल में राहुल श्रीभद्र जी ने पन्नो पर दवा का लेप लगा दिया था खिलजी थूक लगाकर उन पन्नों को पलटता जिससे पेज पर लगी दवा जीभ के द्वारा उसके शरीर में पहुंच जाती इस क्रिया को करते करते वह धीरे-धीरे पूरी तरह ठीक हो गया ।

खिलजी ने स्वस्थ होने के बाद राहुल श्रीधर जी को क्या इनाम दिया

खिलजी ने स्वस्थ होने के बाद राहुल श्रीधर जी को क्या इनाम दिया – जब खिलजी पूरी तरह स्वस्थ हो गया तो स्वार्थी खिलजी के मन में विचार आया कि मेरे हकीम मेरा इलाज ना कर पाए और भारतीय वैद्य ने मुझे स्वस्थ कर दिया मन में इसी दुर्भावना को लिए उसने राहुल श्रीधर जी को मारने की सोची विश्व प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय को किसने और क्यों जलाया फिर उसके मन में नालंदा यूनिवर्सिटी का ख्याल आया कि सारे ज्ञान की जड़ यही यूनिवर्सिटी है तो खिलजी ने सोचा क्यों ना इस नालंदा यूनिवर्सिटी को ही खत्म कर दिया जाए फिर कोई वैध होशियार नहीं बन पाएगा और मानवता के दुश्मन खिलजी ने नालंदा विश्वविद्यालय को जलाने का आदेश दे दिया सनकी खिलजी का आदेश पाकर सेना ने पूरे विश्वविद्यालय को आग के हवाले कर दिया और यूनिवर्सिटी में रखी बेशकीमती किताबें धू-धू कर जलने लगी यूनिवर्सिटी में कितनी किताबें थी इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की यूनिवर्सिटी का 3 महीने तक जलना इस बात को साबित करता है कि नालंदा यूनिवर्सिटी में कितना ज्ञान जला दिया गया और इस यूनिवर्सिटी को बचाते समय कई नालंदा प्रमुख तथा बौद्ध भिक्षुओं की भी हत्या करवा दी गई इस तरह एक भारतीय वैद्य राहुल श्रीधर जी को की अच्छाई का बदला खिलजी ने इस तरह दिया लानत है उन भारतीयों पर जो कि खिलजी को अपने से जोड़कर देखते हैं नालंदा विश्वविद्यालय को क्यों जलाया गया था

आज नालंदा यूनिवर्सिटी होता तो क्या होता

आज नालंदा यूनिवर्सिटी होता तो क्या होता – नालंदा छठवीं शताब्दी में पूरी दुनिया में पढ़ाई के लिए एक मुख्य केंद्र बिंदु था जहां पर कोरिया जापान चीन तिब्बत तुर्की समेत पूरी दुनिया से विद्यार्थी पढ़ने के लिए आते थे अगर आज नालंदा यूनिवर्सिटी सुरक्षित होता है तो भारत स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक अलग मुकाम पर होता आज योग तथा आयुर्वेद का डंका पूरी दुनिया में बज रहा है अगर नालंदा यूनिवर्सिटी में आग ना लगाई गई होती तो भारत दुनिया के सामने योग तथा आयुर्वेद को और भी मजबूती से रखता अगर आपको भारतीय होते हुए नालंदा यूनिवर्सिटी पर गर्व है तो कृपया इस पोस्ट को कम से कम पांच लोगों तक अवश्य शेयर करें ताकि देश नालंदा की महानता तथा उस सनकी खिलजी के बारे में जान सके। नालंदा विश्वविद्यालय को क्यों जलाया गया था

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